मैं थका-भागा, व्यस्त और कोरोनासे भयभीत दिन पुरा करके कार्यालय से घर वापस आया। घर पहुचते ही एहतियात और सावधानी के तौरपे, उससे बात किए बिना या गले लगाये बिना नहाने के लिए सीधे बाथरूम में गया। (इस समय, कोरोना की वजह से बाहरसे घर लौटते ही, सबसे पहले नहाने की सलाह दी गयी है।)
गर्मी के दिन और एक घंटे की यात्रा की वजह से मुझे प्यास लगी थी। लेकिन एहतियात के तौर पर नहाने से पहले पानी के प्याले को भी नहीं छूने का मैने फैसला किया।नहाने के बाद मै तरोताजा और बेहतर महसूस कर रहा था। और अच्छा लगे इसलिये ठंडा पानी पीने का सोच रहा था।
वह सुबह से ही मेरा घर पर इंतजार कर रही थी और जिस पलसे मैं घर लौटा था उसी पल से मुझे देख रही थी। वह नन्ही परी इंतजार कर रही थी की मैं उससे बात करूं, उसे गोदी में उठाऊं और उसके साथ खेलु।
लेकिन गिले अंग से उसे गोद मे लेना ठीक नही यह सोचकर मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने आप को तौलिये से सूखाने और कपड़े पहनने की ज़रूरत है। जहां मैं तैयार हो रहा था वो उस कमरे में आकर, मेरे तरफ देखते हुये कोने मे खडी थी।
वह केवल २० माह की है और मुझे याद नही की उसने हमारी कोइ बात कभी सुनी या समझी हो और उसके अनुसार व्यवहार कीया हो।लेकिन कभी-कभी हमारे कहने के विपरीत काम करके, हमने उसे क्या उपदेश दिया था, हमे ही इसका पुनर्विचार करने पर मजबुर किया है। यह सब पता होने के बावजूदभी,सिर्फ उसे व्यस्त रखने के लिए (ताकि मैं जल्द से जल्द तैयार होकर उसके साथ खेल सकूं, उसे गोद में उठा सकूं) मैंने उसे कहा “आर्णा जा मला पिण्याकरिता एक ग्लास पाणी आन (आर्णा,मेरे पीने के लिए एक ग्लास पानी लाओ)”।
मुझे लगा कि वो मेरी बातों को गंभीरता से नहीं लेगी और इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करेगी और ऐसा कुछ करे ऐसी उम्मीदभी मुझे नहीं थी। शायद उससे उम्मीद करनाभी “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” देखने जैसा होता।
जैसे ही मैंने उसे पिने के लिए पानी लाने को कहा, वह तुरंत कमरे से बाहर चली गई। उसकी यह प्रतिक्रिया देखकर, मुझे एक पल के लिए लगा कि वह मुझसे नाराज है और घुस्सा हो गयी है। क्योंकि उसके साथ खेलने के बजाय मैंने उसे काम करने के लिए कहा और खास कर तब, जब वह सुबह से मेरे साथ खेलने का इंतजार कर रही थी। मैं फिरसे खुदकी तैयारी मे जुट गया ताकि मैं जल्द से जल्द तैयार होकर, उसे गोद मे ले सकूं और उससे बात कर सकूं, उसके साथ खेल सकूं।
२-३ मिनट के बाद वह कमरे में वापस आई और जब मैंने उसके हाथ में पानी की बोतल देखी, तो मैं हैरान रह गया और खुशी से मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी।
जो पानी की बोतल वो लेकर आयी थी, उसमें कल रात का पानी था और वो पानी पेड़ को डालने के लिये बोतल बाहर रखी थी, इस वजहसे वो पानी गर्म हो गया था। ४४℃ तापमान वाले गर्मी के दिनों में वो पानी पिना तकलीफ देनेवाला एवं मुश्किल था। लेकिन उस समय, मैं अपनी २० माह की बेटी द्वारा मेरे प्रति दिखाए गए प्यार,ममता और स्नेह से अभिभूत था (खासकर जब उससे इसकी उम्मीदभी नहीं थी)। मुझे प्यास लगने पर मेरे लिए पीने का पानी लाकर मेरे प्रति उसने जो स्नेह, ममता और प्यार दिखाया था उसको नजरअंदाज कर उसके बाल मन को नाराज नही चाहता था, इसलिए मैंने एक पल के लिए भी बिना कुछ सोचे-समझे उस गर्म पानी को पी लिया। यह देखकर वह खुश होकर टाली बजाने लगी और प्यार से मुस्कुरायी। ये सब देख अचानक मेरी आँखे नम हो गयी।
तब मुझे एहसास हुआ कि हमारी बेटी धीरे-धीरे बड़ी हो रही है और अब वह इतनी बडी हो गयी है की हमारी बाते सुनती, समझती है और उसके अनुसार काम भी करती है, साथ ही अपनी चुुुलबुुली हरकतोसे हमाारे प्रति अपना प्यार भी जताती है।
शायद इसीलिए लोग कहते हैं “बेटियाँ बहुत जल्दी बड़ी हो जाती हैं और माँ-बाप को पता भी नही चलता …”।