
ब्रीद (सीज़न १), गंभीर-भावनात्मक-अपराध-नाटकीय शैली की हिंदी वेब श्रृंखला, जनवरी २०१८ में अमेज़न प्राइम पर औसत लम्बाई ३८ मिनट के ८ भागो के साथ प्रदर्शित हुयी थी।
श्रृंखला की कहानी दो मुख्य पात्रों पर आधारित है। पहला पात्र कबीर सावंत (अमित साध), कहानी का मुख्यनायक, जो शराबी, भावुक, चतुर, साहसी और थोड़ा हिंसक है। वो अपनी छोटी सी बेटी को लापरवाही के कारण दुर्घटना में खो चुका है और उसी दुःख में अब उदास जीवन व्यतीत कर रहा है। साथ ही पत्नी के साथ तुटते रिश्ते को बचाने की कोशिश कर रहा है। दुसरा और सबसे महत्वपूर्ण पात्र है खलनायक डेन्ज़िल “डैनी” मस्करेन्हास का। डैनी की शांत, कुशल, कपटी, मतलबी खलनायक की नकारात्मक भुमिका आर माधवन ने बहुत ख़ूबी और सरलता से निभाई है । डैनी का ६ साल का बेटा फेफड़ों की समस्याओं के कारण ६ महीनों में मरने वाला है।
अन्य मुख्य सहायक भूमिकाओं में है रिया गांगुली (सपना पब्बी) और श्रेया सावंत (रितवी जैन) कबीर की पत्नी और बेटी, जूलियट मस्करेन्हास (नीना कुलकर्णी) डैनी की मां, जोशुआ “जोश” मस्करेन्हास (अथर्व विश्वकर्मा) डैनी का बीमार बेटा, प्रकाश कांबले (ऋषीकेश जोशी) कबीर का सहायक पुलिस अधिकारी, डॉ अरुणा शर्मा (श्रीश्वरा) जोश की डॉक्टर और डैनी की दोस्त/प्रेमिका, मालवनकर (श्रीकांत यादव) भ्रष्ट पुलिस इंस्पेक्टर और कबीर का विरोधी, मार्गरेट मस्करेन्हास (उर्मिला कानिटकर) डैनी की पत्नी,शाइना (मधुरा नाइक) और रॉनी (तरुण गहलोत) डैनी के पड़ोसी, शंकर पाटिल (काली प्रसाद मुखर्जी) कबीर के वरिष्ठ अधिकारी, नीलेश मोहिते (अजीत भुरे) कबीर के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, सुधीर वर्मा (ज्ञान प्रकाश), अनिता साहनी (जयश्री वेंकटरमनन), राजीव नायर (हियतेश सेजपाल) और राहुल प्रधान (चेतन चिटनिस) पंजीकृत अंग दाता और डैनी के शिकार। अन्य छोटी-छोटी सहायक भूमिकाओं में और भी पात्र हैं।
श्रृंखला के सभी पात्रों ने बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन आर माधवन श्रृंखला की जान हैं। उन्होने हमेशा की तरह, अपने ६ साल के बच्चे की जान बचाने के लिए शांत दिमाग से और सुनियोजित तरीके से लोगों को मारने वाले एक सिरफिरे खुनी पिता का उत्कृष्ट और शानदार अभिनय किया है।
श्रृंखला की शुरुवात एक सायरन बजाते जानेवाली एंबुलेंस और अनीता अपनी आत्महत्या का वीडियो रिकॉर्ड कर रही है ऐसे होती है। उसकी मृत्यु के बाद, कोई दरवाज़ा खुला छोड़ फ्लैट से बाहर निकलता है। और कहानी ४ महीने पीछे चली जाती है।
श्रृंखला की कहानी पिता-पुत्र के भावनिक संबंधों पर आधारित है। जोशको जीवित रखने के लिए फेफड़े के प्रत्यारोपण की जरूरत है और उसके लिए सही दाता मिलना जरूरी है। अवयव प्राप्तकर्ताओं की सूची में जोश चौथे स्थान पर है। एक सीधा-साधा फुटबॉल प्रशिक्षक डैनी, जोश को बचाने के लिए शांत-दिमाग का, होशियार,खुनी बन जाता है। डैनी पंजीकृत अंगदाताओ को मारने की साजिश करता है, ताकि जोश को फेफड़ा मिले और वह जीवित रह सके। डैनीने ५ अवयव दाताओं को मारकर उसे प्राकृतिक मृत्यु या दुर्घटना का रूप देने की योजना बनाई है। डैनी जब पहले पंजीकृत दाता (सुधीर वर्मा) को मारने की कोशिश करता है, तो उसकी मृत्यु न होकर वह कोमा में चला जाता है। डैनी दुसरे दाता (राहुल प्रधान) को मारकर, इसे दुर्घटनासे हुयी मृत्यु का रंग चढ़ाता है। लेकिन राहुल की मंगेतर को ये सब थोड़ा अटपटा लगता है और उसे शक होता है। इसलिए वह कबीर से शिकायत करती है।
कबीर, एक शराबी पुलिस इंस्पेक्टर को भी अंग दाताओ की होनेवाली मृत्यु संदिग्ध लगती है, वह अपने मन और अंतर्ज्ञान की सुन इन मृत्यु का रहस्य जानने के पीछे लगता है। ताकि भविष्य में डैनी के हाथो मारे जाने वाले दाताओ को बचाया जा सके। हत्याओ की जांच करते समय, कबीर को पता चलता है की उसकी पत्नी रिया भी एक पंजीकृत अंग दाता है और डैनी उसे भी मारने की योजना बना रहा है। कबीर अपनी पत्नी को बचाने के लिए बात को व्यक्तिगत रूप साथ गंभीरता से लेता है और फिर शुरू होता है कबीर और डैनी के बीच चुहे-बिल्ली का खेल।
यह डैनी और जोश पिता-पुत्र के रिश्ते की एक बहुत ही भावुक और मार्मिक कहानी है। जब डैनी की प्रेमिका डॉ अरुणा शर्मा उसे दाताओं को मारने से रोकने की कोशिश करती है, तो डैनी उसे भी मार देता है। श्रृंखला को देखते हुए दिमाग को पुरी तरह से पता होता है की जोश को बचाने के लिए डैनी जो कुछ भी कर रहा है वह गलत और अनैतिक है, लेकिन भावुक मन इसे स्वीकार नहीं कर पाता।डैनी जो भी गलत या अनैतिक काम कर रहा है, वह केवल अपने ६ साल के बेटे की जान बचाने के लिए कर रहा है, अन्यथा वह एक अच्छा इंसान,सामान्य फुटबॉल कोच और एक अच्छा पिता है ऐसा भावुक मन, दिमाग को समझाने की कोशिश करता रहता है। यही भावनात्मक पिता-पुत्र का रिश्ता श्रृंखला का ऊर्जा स्रोत है। कई दृश्यों को देख भावुक हो आपकी आँखे नम हो जायेगी।
डैनी को अंग दाताओं की वर्गीकृत और गोपनीय सूची कैसे मिलती है? डैनी दाताओ को मारने की योजना कैसे बनाता है? डैनी कैसे सुनिश्चित करता है कि केवल पीड़ित का मस्तिष्क ही मर जाए और अन्य अंग ६-७ घंटे सुरक्षित रहें? डैनी कैसे सुनिश्चित करता है कि मस्तिष्क-मृत शरीर १ या २ घंटे में अस्पताल पहुंच जाए? डैनी हत्याओं को नैसर्गिक मृत्यु या दुर्घटना का रूप कैसे देता है? क्या जोश को फेफड़ा और जीवन मिलता है? कबीर रिया को बचा पाता है? डैनी जोश को बचा पाता है? कबीर डैनी को रोक पाता है? कबीर को डैनी के खिलाफ क्या सबूत मिलते हैं? कबीर को क्यों लगता है कि दाताओं की नैसर्गिक दिखने वाली मौत हत्या है? कबीर इसकी जांच करने के लिए क्यों प्रवृत्त होता हैं? कबीर की बेटी की मृत्यु कैसे होती है? क्या जोश को फेफड़ा और जीवन मिलने से पहले डैनी पकडा जाता है? डैनी की मदद कौन करता है? क्या डॉ अरुणा डैनी की मदद करती है? और कई सवालों के जवाब ब्रीद सीजन १ के ८ भागों में दिए जाएंगे।
आर माधवन द्वारा निभाई गई भावनिक पिता और एक शांत दिमागवाले हत्यारे की नकारात्मक भुमिका, ये एक कारण ही श्रृंखला देखने के लिए पर्याप्त है। कई दृश्यों में आर माधवन, एक पिता की दया आती है या उसके लिए बुरा लगता है।
श्रृंखला में कुछ दृश्य और चरित्रको कुछ विशेष महत्व के नहीं हैं, इसलिए हटाये जा सकते थे। श्रृंखला का अंत थोड़ा नाटकीय और अस्वीकार्य है लेकिन, यह एक काल्पनिक भावनात्मक अपराध पर आधारित श्रृंखला है, इसलिए अंत भावनाओं और नियमों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
बढ़िया भावनात्मक कहानी, सुंदर अभिनय, डैनी-कबीर की जुगलबंदी, पिता-पुत्र के बीच दिखाई गयी आत्मीयता आदि कई कारणों के वजहसे यह शृखंला देखने लायक बनी है। उत्कृष्ट पात्रों और अभिनय से सजी भावनात्मक-अपराध की ये कहानी दर्शकों के लिए मनोंरजन की सौगात है।