
ब्रीद (सीजन २) -इन टु द शडोज़, जुलाई २०२० में अमेज़न प्राइम पर प्रदर्शित हुयी एक गंभीर-भावनात्मक-रहस्य-मानसिक-अपराध-नाटकीय शैली की वेब श्रृंखला। औसत लंबाई ४०-४५ मिनट और ५७ मिनट का अंतिम भाग ऐसे १२ भागो वाली थोड़ी लंबी हिंदी वेब मालिका।
कहानी के कुछ पात्रों को छोड़कर, इसका ब्रीद सीज़न १ से कोई संबंध नहीं है, इसलिए आप इस श्रृंखला को जे का बदला, खुनी कौन, रावण, दशानन आदि किसी भी शीर्षक के साथ देख सकते हैं।
कहानी ४ मुख्य पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है। पहला किरदार सीजन १ से ही लेकिन पूरी तरह बदला हुआ इंस्पेक्टर कबीर सावंत (अमित साध) अच्छा, भावनात्मक, स्नेही, सख्त, बिल्कुल नशा नहीं करनेवाला, उत्साही व्यक्ती। छह महीने की कैद काटने के बाद मेघनाकी देखभाल करने या उसकी मदद करने के हिसाब से निवेदन कर खुदका तबादला दिल्ली करवा लेता है।
सीजन २ के नए पात्र, अविनाश सबरवाल (अभिषेक बच्चन), मनोचिकित्सक, अमीर, पारिवारिक व्यक्ति और उसकी पत्नी आभा (नित्या मेनन), पेशे से शेफ और एक बच्ची की माँ।
कहानी का चौथा मुख्य पात्र और खलनायक जे, मानसिक रोगी और साइको किलर (यदि आप श्रृंखला को देखने का निर्णय लेते हैं तो इस पात्रके के रहस्य ५ वें भाग में पता चलेंगे, अन्यथा बिना देखे ज्यादा खुश रह सकते हैं।)
अन्य मुख्य सहायक भूमिकाओं में हैं सिया सबरवाल (इवाना कौर) अविनाश की बेटी,प्रकाश कांबले (हृषिकेश जोशी) सीजन १ का ही पात्र, जयप्रकाश (श्रीकांत वर्मा) दिल्ली क्राइम ब्रांच में कबीर के सहाय्यक, झेबा रिज़वी (श्रद्धा कौल) दिल्ली क्राइम ब्रांच में कबीर की प्रतिद्वंद्वी और एक स्वार्थी वरिष्ठ अधिकारी, शर्ले (सयामी खेर) एक कॉल गर्ल, मेघना वर्मा (प्लाबिता बोरठाकुर) एनिमेशन स्टूडियो में काम करने वाली एक लड़की जिसे बंदूक की गोली से बचाने के लिए कबीर उसे बालकनी से धक्का देता है तब उस दुर्घटना में अपने दोनों पैर खो देतीं है, गायत्री मिश्रा (रेशम श्रीवर्धन) मेडिकल छात्रा जिसका अपहरण जे सियाकी देखभाल करने के लिए करता है, प्राचार्य कृष्णन मूर्ति (निज़ालगल रवि) अविनाश और जे के आवासीय विद्यालयके प्राचार्य और जे के पा, तेजिंदरसिंह (सुनील गुप्ता) कबीर के बॉस, तरुण अविनाश (वारिन रूपानी), वृषाली (विभावरी देशपांडे) ढाबा मालिक, प्रितपालसिंह भरज (कुलजीत सिंह), नताशा गरेवाल (श्रुति बापना) और अंगद पंडित (पवन सिंह) जे के लक्ष्य और अविनाश के तीन शिकार। कहानी में अन्य और भी छोटे छोटे किरदार हैं।
मेघना, नित्या और एबी के कुछ दृश्यों को छोड़कर बाकी सभी ने अच्छा अभिनय किया। कबीर के अभिनय ने अविनाश की मेहनतको पूरी तरहसे छुपा दिया है।
कहानी एक जगराता के दृश्य से शुरू होती है, जहां गायत्री पढ़ रही है। परीक्षाके कारण, वह पढ़ाई के लिए अकेले ही घर जाने के लिए निकलती है और एक सुनसान सड़क पर उसका अपहरण हो जाता है।
अदालत में डॉक्टर अविनाश साबित करता है कि जिस लड़की ने अपने चाचा के पूरे परिवार को मार डाला है, वह कई व्यक्तित्व विकार से पीड़ित नहीं है। डॉक्टर अविनाश ऐसे कई मामलों में पुलिस की मदद करता रहता है।
अविनाश एक खुशहाल पारिवारिक व्यक्ति जिसके परिवारमें सिर्फ बेटी सिया और पत्नी आभा ही हैं। सिया को मधुमेह होने के कारण हर ४ घंटे में इंसुलिन देना जरुरी है। एक फार्महाउसपर आयोजित सियाके दोस्त की जन्मदिन पार्टी से सिया का अपहरण हो जाता है।अविनाश और आभा सिया को खोजने के लिए जमीन-आसमान एक कर देते हैं, लेकिन सियाके बारे में कुछभी जानकारी उनके हाथ नहीं लगती।
अपहरण के ९ महीने बाद, अपहरणकर्ता अविनाश और आभा को सिया को बचाने के लिए प्रितपालसिंह की हत्या करने को कहता है।लेकिन हत्या के वक़्त उसकी “क्रोध” की भावना बाहर निकालकरही उसे मारना है और हत्या को चित्रित कर विडिओ एक वृत्तवाहिनी को भेजने के लिए कहता है।प्रितपालसिंह के बाद, नताशा की “वासना” की भावना बाहर निकालकर उसे मारने के लिए कहता है और फिर से पहले की तरहही हत्या को चित्रित कर वृत्तवाहिनी को भेजने को कहता है। उसके बाद, जे उन्हें अंगद को मारने के लिए कहता है लेकिन इस बार की भावना होती है “डर” और उन्हें फिर से हत्या चित्रित करनी होती है।अविनाश और आभा, सिया को बचाने के लिए प्रितपालसिंह, नताशा और अंगद की क्रोध,वासना और डर की भावना को बाहर निकालकर हत्या करते है।इन हत्याओं के बारे में सोचने के बाद डा. अविनाशको लगता हैं किसी व्यक्ति की कोई एक भावना बाहर निकालकर उसे मारने का संबंध कही ना कही रावण के दस सिरो से जुड़ा है और रावण का प्रत्येक सिर एक अलग भावना का प्रतीक है। अपहरणकर्ता उन्हें हर लक्ष्य को मारने के लिए रावण के दस सिर से जुड़ी एक-एक भावना का उपयोग करने के लिए कह रहा है।और अगर ऐसा है, तो अपहरणकर्ता उन्हें दस लोगों को मारने के लिए कहेगा। उन सब हत्याओ को रोकने के लिए, अविनाश अपहरणकर्ता द्वारा भेजे गए वीडियो से कुछ सबूत खोजने की कोशिश करता है, लेकिन उसे विडीओसे कुछ नहीं मिलता।उधर अपहरणकर्ता के अड्डेपर गायत्री सिया की अच्छी देखभाल करती है और सिया के साथ वहाँ से भागने की २-३ बार नाकाम कोशिशभी करती है।
चित्रित कर वृत्तवाहिनी पर दिखाई गयी इन क्रूर हत्याओं की जांच की जिम्मेदारी कबीर लेता है। सिया के लौटने से पहले गिरफ्तारी से बचने के लिए जुगाड़ कर अविनाशभी उस जांच में शामिल हो जाता है। कबीर धीरे-धीरे हत्याओंके साथ अविनाश और जे के संबंध का और हत्याओ से जुड़े रहस्यों का खुलासा करता है।
जे कौन है? जे की भूमिका किसने निभाई है? जे कैसे सिया का अपहरण करता है? मधुमेह से ग्रस्त सिया की ९ महीने तक जे कैसे देखभाल करता है? सिया और गायत्री का अपहरण जे क्यों करता है ? जे, अविनाश के हाथोसे लोगोंकी हत्या क्यों करवाता है? अविनाश या जे से इन लोगों का क्या संबंध होता है? अविनाश इन सभी हत्याओं को कैसे अंजाम देता है? जे के निशाने पर और कितने लोग हैं? क्या अविनाश और लोगों को मारने से पहले, कबीर सिया को मुक्त कर पाता है? क्या कबीर अविनाश और आभा को रोकने में सफल होता है? मेघना के साथ अंतमे क्या होता है? कबीर के साथ उसका क्या रिश्ता होता है? जेपी और प्रकाश कबीर को कैसे मदद करते हैं? इस सब में शिर्ले की क्या भूमिका है? कबीर को कैसे पता चलता हैं कि अविनाश ही इन हत्याओं के पीछे है? क्या आभा इन हत्याओं में अविनाश की मदद करती है? यह हत्याओं का खेल कैसे खत्म होता है? क्या जे अविनाश का मरीज है? हत्या या अपहरण में क्रोध, वासना, डर जैसी अलग अलग भावनाओं का क्या संबंध है? अंतिम भाग शर्ले के हाथ में सी-१६ लिखे कागज के टुकड़े के साथ समाप्त होता है,सी-१६ वास्तव में क्या है? इन सभी रहस्यों के साथ कई और रहस्यों का खुलासा श्रृंखला के १२ भागो में किया जाएगा।
कई पात्र और दृश्य कहानी या श्रृंखलामें अप्रासंगिक, असंबंधित,अनवाश्यक हैं, इसलिए श्रृंखला लंबी और उबाऊ हो गई है। दिखाए गए कई दृश्य और घटनाये तर्कहीन हैं और समझने या विश्वास करने में मुश्किल हैं। कहानी के साथ-साथ निर्देशन, संपादन भी कमजोर और अप्रासंगिक है।
श्रृंखला समाप्त होती है अविनाश द्वारा शर्ले के हाथ में दिये सी-१६ लिखे एक कागज के टुकड़े के साथ। जे के जीवन के साथ सी -१६ भी एक नया और अनसुलझा रहस्य बन जाता है और श्रृंखला समाप्त होती है।इसका अर्थ आप श्रृंखला के अगले सीज़न का इंतजार कर सकते हैं।
कहानी में कुछ नया नहीं है, इस तरह की कहानी शायद आपने पहले भी देखी हो सकती है। रुचि, रोमांच, उत्साह और जिज्ञासा ५ वें भाग तक बढ़ती है, लेकिन जैसे ही जे के रहस्य से पर्दा उठता है, उसके बाद श्रृंखला को केवल फ्लैशबैक, बदला, योजना के चक्करों में घुमाया है और उसे देखनेमें में रोमांच और उत्साह नहीं रहता। लंबी और धीरे-धीरे चलती श्रृंखला और कहानी बीच बीच में लय छोड़ देती है इसलिए उबाऊ और नीरस लगती है।श्रृंखला पर्याप्त भावनिकभी नहीं बनी है।अगर आपके पास ९-१० घंटे का खाली समय है और देखने के लिए और कुछ मनोरंजक, रोमांचक नहीं है, तो कबीर के अभिनय के लिए इस श्रृंखला को देख सकते हैं। अन्यथा श्रृंखला न देखकर समय बचाने के लिए श्रृंखला में कई कारण हैं।