
बंदिश बैंडिट्स, एक हिंदी वेब श्रृंखला जिसकी मुख्य कथा संगीतमय प्रेम कहानी के साथ, एक संगीत परिवार के मतभेद के वजहसे विरासत प्राप्त करने या उसपर प्रभुत्व पाने के लिए होने वाली रोमांचकारी-नाटकीय प्रतियोगिता पर आधारित है । भारतीय शास्त्रीय संगीत से भरपूर और औसतन लंबाई ३३ से ५० मिनटवाले १० भाग अगस्त २०२० के पहले सप्ताह में अमेज़न प्राइम पर प्रदर्शित हुए हैं।
मुख्य भूमिकाओ है, तमन्ना (श्रेया चौधरी) एक युवा, सुंदर, ऊर्जा से भरी, महत्वाकांक्षी लोकप्रिय पॉप गायिका, प्रसिद्ध ऑनलाइन मीडिया तरिका, जो संगीत कार्यक्रमों में सुंदर गीत गाती हैं लेकिन दर्शकों के सामने गाने से डरती हैं। संगीत कंपनी जेपी के साथ उनका अनुबंध विश्व प्रसिद्ध गायक क्वीन एली के साथ गायन के उनके सपने को पूरा करने में मदद करेगा। हालाँकि, कंपनी के साथ उनका अनुबंध ख़तरे में है क्योंकि वह कंपनी को 3 सफल गाने देने के अपने वादे को पूरा नहीं कर पा रही है। उसके अपनी माँ के साथ मतभेद है और उनसे कोई भी मदद लेना उसे पसंद नहीं है। और राधे (ऋत्विक भौमिक) एक युवा, ऊर्जावान, भारतीय शास्त्रीय गायक जो गंडाबंधन कर पंडितजी का उत्तराधिकारी बनना चाहता हैं, संगीत सम्राट बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए, वह घराने के विभिन्न गीत, राग और संगीत पंडितजीसे सीखना चाहता हैं।
सहाय्यक भूमिकाओ में है, पंडित राधमोहन राठौर (नसीरुद्दीन शाह) एक महान भारतीय शास्त्रीय गायक जिन्होंने बीकानेर घराने से संगीत सीखा है, पिछले पच्चीस सालोसे वे जोधपुर के संगीत सम्राट हैं, जो जोधपुर के महाराजा से विशेष सन्मान प्राप्त व्यक्ति है, उन्होंने बीकानेर घराने का नाम बदलकर राठौर घराना किया है और जो वर्तमान में अपने घराने के लिए उत्तराधिकारी की तलाश में हैं, जो उनकी विरासत, घराना आगे बढ़ायेगा और संगीत की सेवा करेगा, अतीत में उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए जानबूझकर कुछ गलतियाँ की हैं। दिग्विजय (अतुल कुलकर्णी) पंडितजी के छात्र और एक उत्कृष्ट, महान गायक, उनके बारे में एक रहस्य श्रृंखला देखकर ही जानना बेहतर है। मोहिनी (शीबा चड्ढा) राधे की माँ और इनके बारे में भी एक रहस्य है जो श्रृंखला देखकरही जानना बेहतर है।राजेन्द्र (राजेश तैलंग) राधे के पिता, जो बैंक ऋण में पूरी तरह डूबे हैं, जिनका गंडाबंधन हुआ था ऐसे पंडितजी के विद्यार्थी और पुत्र। देवेंद्र (अमित मिस्त्री) पंडितजी के छोटे बेटे, राधे के चाचा और सल्लागार, जिनका गंडाबंधन हुआ था ऐसे एक और पंडितजी छात्र जिन्हें संगीत सिखना बंद करना पड़ा क्योंकि उन्हें एक विदेशी लड़की से प्यार हो गया था। अर्घ्या (कुणाल रॉय कपूर) जेपी कंपनीका कर्मचारी और तमन्ना का व्यवस्थापक, दोस्त। कबीर (राहुल कुमार) राधे का सबसे अच्छा और करीबी दोस्त, जो कार्यक्रमोंका निर्देशक है, वही जोधपुर में तमन्ना के शो का प्रबंधन करता है और राधे-तमन्ना को मिलवाता और उनकी अक्सर मदद करता है। राजाजी (दिलीप शंकर) जोधपुर के महाराजा और पंडितजी के प्रशंसक जो संगीत सम्राट प्रतियोगिता का आयोजन करते है। हर्षवर्धन (ऋतुराज सिंह) तमन्ना के पिता। मुंशीजी (शशि किरण) महाराज के लेखापाल। अवंतिका (मेघना मलिक) तमन्ना की माँ। रंधावा (संजय नाथ) जेपी म्यूजिक कंपनी के मालिक। विकास यादव (अजय कुमार) बैंक व्यवस्थापक। सूर्या (हर्ष सिंह) महाराज के भाई और राजेंद्र के दोस्त। संध्या (त्रिधा चौधरी) महाराज के भतीजी, राधे की मंगेतर, जिसने बेल्जियम में संगीत सीखा और यूट्यूब से भारतीय शास्त्रीय संगीतकी शिक्षा लियी है, पंडितजी के संगीत की चाहती और प्रशंसक। गोपीनाथ (सुनील पुष्करणा) मोहिनी के पिता। पड्डू (प्रियंका आर्य) तमन्ना की अच्छी दोस्त जिसकी शादी उदयपुर में होती है।
नसीरुद्दीन शाह और अतुल कुलकर्णी, अभिनयक्षेत्रके दो रत्न। कलाकारों की सूची में उनके नामों की उपस्थिति मात्र ही वेब श्रृंखला देखने के लिए पर्याप्त है। कबीर और अर्घ्या ने विनोदी-भावनिक दोस्त-लव गुरु जैसी विभिन्न भूमिकाओं में शानदार काम किया है, बाकी अभिनेताओं ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है। कुछ दृश्यों में अभिनय अनैसर्गिक लगता है, लेकिन स्वीकार्य है। नकाबपोश आदमी के दृश्य बहुत ही कृत्रिम, विनोदी और थोड़े अजीब लगते है। शायद यह संगीत-नाटक शैली श्रृंखला में एक नया प्रयोग हो।
यह श्रृंखला जोधपुर में शुरू होती है, जहां पंडितजी सरस्वती माता और वीणा की पूजा करते हैं और अपनी हवेली में संगीत सीखने के लिए आये छात्रों की कक्षा और रियाज लेते हैं। मुंबई में, तमन्ना एक दोपहिया वाहन से जोधपुर के लिए निकलती है और अर्घ्या जेपी म्यूजिक कंपनी के साथ तमन्ना के अनुबंध पर चर्चा कर रहा होता है।
श्रृंखला दो अलग-अलग शैलियों के गायक, तमन्ना पॉप-डिस्को गायक और राधे भारतीय शास्त्रीय गायक की प्रेम कहानी से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे कुछ अलग ही रूप लेती है और प्रेमकहानी के थोड़े तड़के के साथ संगीत प्रतियोगिता-संघर्ष-नाटक-रहस्यवाली कहानी का रूप लेती है। यह घराना और परिवार पर प्रभुत्व के लिए होनेवाली प्रतिस्पर्धा और संघर्ष की कहानी है। कहानी में धीरे-धीरे सामने आता है कि कैसे एक आदमी के अहंकार और गर्व की वजहसे अतीत और वर्तमान में परिवार में मतभेद और द्वेष निर्माण हुआ है। श्रृंखला जिसपर आधारित है वो कहानी कुछ सामान्यही है, लेकिन दिखाए गए रहस्य और कहानी को दिए गए मोड़ दिलचस्प और रोमांचक हैं।
पंडितजी को पेशेवर गायन पसंद नहीं है क्योंकि वे भारतीय शास्त्रीय संगीत के भक्त, विद्वान और प्रशंसक हैं।वे अपने सर्वश्रेष्ठ और विशेष छात्र को अपने घराने का सबसे अच्छा और विशेष संगीत सिखाएंगे, जो घराने का उत्तराधिकारी भी होगा और राठौर घराने को आगे ले जायेगा। दिग्विजय,पंडितजी का पुराना और सर्वश्रेष्ठ छात्र, लेकिन पंडितजी ने उसे पेशेवर गायन की वजहसे और अन्य कुछ कारणोंसे वर्ग और घराने से बाहर कर दिया था। अब वह एक धनी व्यक्ति और एक बड़ी संगीत कंपनी के मालिक है। वह कई साल बाद लौटते है और पंडितजी के राठौर घराने पर वर्चस्व प्राप्त करने के लिए संगीत सम्राट प्रतियोगिता की चुनौती स्वीकार करते है।
पंडितजी का गायक, होशियार, तेज छात्र राधे गंडाबंधन और घराने का विशेष छात्र बनने का अवसर खो देता है। देवेंद्र की सलाह से वह पंडितजी की शुद्धिकरण परीक्षा देने को तैयार होता है और परीक्षा उत्तीर्ण कर, वह गंडाबंधन के बाद घराने का विशेष छात्र बन जाता है। राधे को अपने पिता के कर्ज और हवेलीके नीलामी के बारे में पता चलता है,इस वजहसे वह तमन्ना के साथ साझेदारी करता है और नकाबपोश के रूप में गाने गाता है। वह भारतीय शास्त्रीय संगीत संलयन के साथ गाता है,इस साझेदारी के कारण राधे कुछ ही समय में संगीत की दुनिया में धूम मचा देता है और बहुत प्रसिद्धि प्राप्त करता है। राजेंद्र और देवेंद्र की मदद से, राधे हवेली को बचाता है और बाकि ऋण का भी भुगतान करता है, लेकिन पंडितजी इसके बारे में कुछभी नहीं जानते हैं।
पंडितजी धीरे-धीरे अपनी सुनने की शक्ति खो रहे हैं और अब आगे गा नहीं पाएंगे, इसलिए वह दिग्विजय के खिलाफ संगीत सम्राट प्रतियोगिता में गाने के लिए राधे को चुनते हैं। लेकिन जब पंडितजी को राधे के तमन्ना के साथ व्यावसायिक गायन के बारे में पता चलता है, तो वह राधे को संगीत सिखाने से मना कर देते है और मौन-व्रत ले लेते है। उसके बाद पंडितजी का गौरव, स्वाभिमान, छवि, परिवार और संगीत घराना बचाने के लिए बिखरा हुआ राठौर परिवार एक साथ आता है।
तमन्ना और राधे एक दूसरे से प्यार करते हैं और स्वीकारभी करते हैं। लेकिन राधे की इच्छा के खिलाफ, पंडितजी संध्या के साथ उसकी शादी पक्की करते हैं। राधे तमन्ना से प्यार करता है, संध्या को इस बात का पता चलने के बाद भी वो शादी रद्द करने से इंकार करती है, लेकिन कुछ समय बाद, वो खुद ही शादी तोड़ देती है।
कोई भी संगीत-प्रेम कहानी जुदाई, दिल टूटना और प्रणय के बिना अधूरी है, तमन्ना राधे के बीच झगड़ा होता है और उनका रिश्ता टूट जाता है।संगीत सम्राट की प्रतियोगिता केवल जोधपुर राज्य तक ही सीमित है, लेकिन राधे को लोकप्रियता और समर्थन हासिल करने के लिए, अर्घ्या प्रतियोगिता को पेशेवर और बड़ा बनाने के लिए महाराजा को मना लेता है। इसके अलावा, कई प्रेम कहानिया,संगीत प्रतियोगिता और पारिवारिक मसाले को कहानी में जोड़ा गया है।
मुख्य प्रश्न, क्या राधे पंडितजी के सर्वश्रेष्ठ छात्र और स्थापित गायक दिग्विजय को हराकर घराना बचा पाता है? राधे और तमन्ना की मुलाकात कैसे होती है? तमन्ना राधे से रिश्ता क्यों तोड़ती है? राधे संध्या से शादी करने के लिए क्यों तैयार होता है? संध्या राधे के साथ होनेवाली शादी क्यों तोड़ती है? राजेंद्र पर इतना कर्ज क्यों होता? पंडितजी के मना करने के बाद राधे को संगीत कौन सिखाता है? अचानकसे दिग्विजय कहां से आता है और वह कौन है? अमीर, प्रसिद्ध और सफल गायक दिग्विजय घराने के स्वामित्व के लिए दावा क्यों करता हैं? वह घराने का नाम राठौर से बिकानेर क्यों करना चाहता है? क्या क्वीन एली के साथ गाने का तमन्ना का सपना सच होता है? क्वीन एली तमन्ना की जगह राधे को क्यों चुनती? तमन्ना की माँ बेटी का सपना पूरा करने में बिना बेटी को पता चले उसकी कैसे मदद करती है? तमन्नाके करार का जेपी कंपनी क्या करती है? राधे,व्यावसायिक गायन शुरू करने के बाद परिवार से अपनी पहचान कैसे छिपाता है? २५ साल पहले संगीत सम्राट प्रतियोगिता में पंडितजी को किसने हराया था? उस विजेता का आगे क्या होता है? पंडितजी अपना गौरव और संगीत सम्राट का खिताब फिरसे कैसे हासिल करते हैं? पंडितजी मौन व्रत क्यों चले जाते हैं?मोहिनी अपने प्रतिद्वंद्वी दिग्विजय से बार बार क्यों मिलती है? बंदिश बैंडिट्स क्या हैं? उसका आगे क्या हुआ? क्या तमन्ना और राधे फिरसे एक होते है? बंदिश बैंडिट्स के १० भागोमें ऐसे कई सवालों के जवाब और कई मसाले, रहस्य, रोमांच सामने आएंगे।
यह एक अच्छी और सुन्दर संगीतमय प्रेम कहानी है, जिसमें कहानी हल्के-फुल्के रहस्योद्घाटन के साथ संगीत घराने के विरासत को लेकर होनेवाले संघर्ष के उतार-चढ़ाव के इर्द-गिर्द घूमती है। श्रृंखला एक रोमांचक मोड़ के साथ समाप्त होती है, इसलिए हम श्रृंखला का अगला सीज़न शुद्ध संगीत प्रेम कहानी या संगीत प्रतियोगिता के अगले चरण की कहानी के साथ आने की उम्मीद कर सकते हैं।
इस वेब श्रृंखला में इस्तेमाल किये गए भारतीय शास्त्रीय गीत और साथही मधुर और मोहक संगीत श्रृंखला को देखने के लिए, ये एकमात्र कारणही बस है। पंडितजी, मोहिनी और दिग्विजय की उपस्थिति और उनका गुणवत्तापूर्ण उच्चकोटिका अभिनय दर्शकों के लिए बोनस है। कबीर और अर्घ्या अपनी हरकतोसे बीच-बीच में हँसाने में कामयाब रहे है। संगीत परिवार पर वर्चस्व के संघर्ष को दियी गयी एक अच्छी प्रेम कहानी की जोड़ और मारधाड़ वाले दृश्य के बिना रोमांचक करने वाली ये श्रृंखला आप निश्चित रूप से देख सकते हैं। संगीत प्रेमियों के लिए संगीत की दावत ही है।