“द्रौपदी का महाभारत” “पॅलेस ऑफ इल्यूजन (भ्रम का महल)” – चित्रा बनर्जी दिवाकरुनी – Book Review

Good Book to Read

“पैलेस ऑफ इल्यूजन” या “द्रौपदी की महाभारत”, एक अलग चरित्र के दृष्टिकोण से देखी गई महाभारत की आकर्षक कहानी मतलब यह किताब है। महाभारत का एक मुख्य और महत्वपूर्ण पात्र पांचाली या द्रौपदी या क्रिष्णा के नजरसे देखते हुए एक नये लेखकका दृष्टिकोण इस किताब में पढ़ने मिलता है। शीर्षक “पैलेस ऑफ इल्यूजन (भ्रम का महल)” पुस्तक को पूरी तरह से सूट करता है, क्योंकि लेखक ने पांचालीके बचपन से लेकर मृत्यु तक की जीवनयात्रा में “पैलेस ऑफ इल्यूजन” पर ही ध्यान केंद्रित रखा है।

जब घटनाओं, पात्रों, कहानियों को बदलने या उनमें हेरफेर करने का कोई अवसर नहीं होता तब मुख्य कहानी के मुख्य पात्रों में से एक के दृष्टिकोण से पूरी पुस्तक लिखना आसान नहीं है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात,यह है की यह कार्य और भी कठिन हो जाता है, जब आप प्रसिद्ध, महान, सर्वश्रेष्ठ और अब तक लिखी गयी सबसे बड़ी पौराणिक किताब के एक प्रमुख पात्र के दृष्टिकोण से कहानी लिखते हैं।लेकिन लेखक चित्रा बनर्जी दिवाकरुनी ने उस कठिन कार्य को बहुत ही अच्छी तरह से निभाया है और पाठकों को एक अच्छी किताब उपहार दी है। संक्षेप में, यह (काल्पनिक या सत्य?) पौराणिक कथापर आधारित काल्पनिक किताब है।

किताब के बारे में दो बातें थोड़ी अजीब लगती हैं। पहली बात,थोड़ी महत्वहीन की दुर्योधन की बहन दुशला परिवार की वंशवृक्ष से गायब है (जो किताब महाभारत में एक मुख्य महिला पात्र के दृष्टिकोण से और एक महिला द्वारा लिखित है उसमें ऐसा होना थोड़ा आश्चर्यचकित कर जाता है )।

दूसरी बात, द्रौपदी के मन में कर्ण के बारे में “स्वयंवर” (संभवत: जिस समय से वह कर्ण तस्वीर देखती है तब से) से लेकर उसकी मृत्यु तक दिखाया गया एकतरफा प्यार, चिंता, सम्मान और आकर्षण है। खासकर उसकी शादी के बाद हर महत्वपूर्ण घटनामें कर्ण का उल्लेख या द्रौपदी के मनमें कर्ण का विचार चित्रित किया है। इस प्रेम का उल्लेख करने या उसके बारे में लिखने वाली यह पहली किताब है ऐसा नहीं है। इसे स्वीकार करना या नहीं करना, इसे किस तरीके से देखना यह पूरी तरह से पाठक, उसकी मानसिकता और उसके दिमाग में कर्ण की छवि पर निर्भर करता है। कर्ण केवल कुंती का सबसे बड़ा पुत्र है इसलिए या शायद किसी अन्य वजहसे, कर्ण के प्रति द्रौपदी का प्यार, चिंता और आकर्षण दिखाना आवश्यक नहीं है। पूरी किताबे में लिखित ज्यादातर घटनाओं में द्रौपदी का कर्ण के प्रति प्यार, चिंता, आकर्षण और सम्मान दिखाया है।अंततः, इस कल्पना या तथ्य को कैसे दिखाना, लिखना, इसके के बारे में क्या सोचना, यह पूरी तरह लेखक की अभिव्यक्ति स्वतंत्रता, विचार, लेखन शैली और पाठक की सोच, मानसिकता के संयोजन और मिलाप की बात है।

महिलाओं की स्वभाव में हर छोटी से छोटी चीज, जैसे की उनकी जिज्ञासा, ईर्ष्या, क्रोध करना, संदेह करना, प्रतिस्पर्धा करना, आपत्ति करना, पुरानी (गलत) परंपराओं पर उंगली उठाना, उनका विरोध करना, अपनी छोटी-छोटी चीजों पर गर्व करना, गहने, कपड़े, घर सजाने जैसे अलग अलग चीजों का आकर्षण, उनसे लगाव, प्यार, उनका धैर्य, धीरज, संयम, उनसे होनेवाली जबरदस्ती, उनकी सोच, उनका स्वभाव और अन्य कई छोटी-छोटी चीजें सोच-समझकर और बहुत अच्छी तरह से किताब में प्रस्तुत कियी हैं, जो किताब की ताकद है। द्रौपदी की राज्य के शासन-प्रशासन में, नियम कायदे बनाने में, महिलाओं के अधिकारों, प्रगति, वैचारिक उलझाव में, और इसके लिए उनके नेतृत्व और संघर्ष वाली भूमिका के साथही कई जगहों पर एक महिला के रूप में उनकी लाचारी, कमजोरी, होने वाला असहयोग, उनके साथ होनेवाला व्यवहार, उनके विचार,निर्णय की होनेवाली उपेक्षा, आदि सब चीजों को भी बहुत ही अच्छी तरह से लिखा गया हैं। द्रौपदी का भाई द्रुष्टद्युम्न, शिखंडी, धाय माँ के प्रति प्यार, लगाव, स्नेह, उनका बचपन, शिक्षा, उनके पिता द्रुपद के जीवन में उनका स्थान, द्रौपदीके जीवन में द्रुपद का स्थान,विवाह से पहले पिता के महल में व्यतीत जीवनकाल को बहुत ही आकर्षक रूप से दर्शाया गया है। कुंती के साथ उनके रिश्ते को वर्तमान स्थिति के बेटा-सास-बहु के रिश्ते को ध्यान में रखते हुए लिखा गया हैं, पांडवों का जीवन, शैली, स्वभाव को अपने नियंत्रण में रखने के लिए कुंती के साथ द्रौपदीका शीत युद्ध, तनाव, खेले जाने वाले दांवपेच,अपने पसंद जैसा, खुदका सुंदर,प्यारा,बड़ा, पुरे स्वंतंत्रता के साथ जैसा वह चाहती है वैसा शानदार महल बनाने की द्रौपदी की इच्छाको बहुत ही अच्छी तरह से वर्णित किया गया हैं।

महाभारत, उस पर आधारित किताबें,कहानी, कथाये महत्वपूर्ण पात्र “श्रीकृष्ण” के बिना पूरी नहीं हो सकती। इसलिए, द्रौपदी के जीवन में या महाभारत में “श्रीकृष्ण” की भूमिका का अलग से उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है। इस किताब में भी “श्रीकृष्ण” की भूमिकाको बहुत ही अच्छी तरह से वर्णित किया है। किताब मुख्य रूप से द्रौपदी, उसके जीवन संबंधित या उसके कहानीको प्रभावित करनेवाली महाभारत की घटनाओं पर केंद्रित है।

पांचाली, यज्ञ से जन्मी तेजस्वी कन्या। द्रोणाचार्य के छात्र पांडवों के खिलाफ युद्ध हार और उनका युद्धबंदी बनने के बाद राजा द्रुपद अपमानित और अस्वस्थ हो जाता है। द्रोणाचार्य की शक्ति और ज्ञान पता होने के वजहसे, द्रोणाचार्य की हत्या कर अपमान का बदला ले सके ऐसे पुत्र की प्राप्ति के लिए राजा द्रुपद यज्ञ करते हैं। यज्ञ से राजा द्रुपद के इच्छानुसार पुत्र द्रष्टद्युम्न और अवांछित उपहार पुत्री द्रौपदी उत्पन्न होते है और साथ ही एक भविष्यवाणी भी होती है। भविष्यवाणी बताती है कि यह लड़की इतिहास का मार्ग बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी। द्रौपदी ने इतिहास को कैसे बदला या इतिहास बदलने में उसकी क्या भूमिका थी, इसकी कहानी हम महाभारत से अच्छी तरह जानते है, फिर भी वो कहानी इस मनोरंजक किताब में पढ़ना रोमांचक और दिलचस्प है।

किताबमें कुछ पंक्तियाँ बहुतही अच्छी लिखी गई हैं। जैसे शिखंडी द्रौपदी को कहता है “(महिला) अपने सम्मान का बदला लेने के लिए पुरुष की प्रतीक्षा करेगी और वह प्रतीक्षा ही करती रहेगी”, या द्रौपदी के शिक्षासे “उम्मीदें रास्ते में छिपे पत्थरों की तरह हैं – वे सिर्फ आपको ठोकर ही देती हैं या आपसे गलतिया ही करवाती है”।

द्रौपदी और उसका “पॅलेस ऑफ इल्यूजन (भ्रम का महल)” जो उसे द्युत क्रीड़ा और युद्ध के बाद छोड़ना पड़ा था, ऐसा एक पूरा हुआ सपना और जिससे वह अपनी मृत्यु तक प्यार करती रही, इन दो चीजों के लिए यह किताब अवश्यही पढ़ने लायक है।

Published by Chetan Nikam

Father of Cute, Sweet, Lovely Daughter who makes me to forgot all my worries, trouble and tension by single word "BABA". Engineer by profession

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