बेटी…….अष्टलक्ष्मी

आर्ना…खुशियों की पोटली

Little Hands of our Ashtalakshmi Aarna

महाराष्ट्र में जब भी किसीके घर बेटी का जन्म होता है, तो “अभिनंदन लक्ष्मी आली किंवा धनाची पेटी आली” (बधाई हो आपके घर लक्ष्मी आयी है या धन की पेटी आयी है) कहकर लोग बधाई देते है। तुम्हारा जन्म होने से पहले तक मैं सोचता था, किसी पिता को उसकी बेटी के जन्म के बाद हुए अचानक धनलाभ की वजहसे विकसित और लोकप्रिय हुआ एक सरल वाक्यांश है।

लेकिन तुम्हारे जन्म के बाद, जब पहली बार मैंने तुम्हे अपने हाथो में लिया तब तुम्हारे छोटे-छोटे हाथ-उंगलिया, छोटी-छोटी काली आंखें और मेरी हथेली से भी छोटा सिर देखकर आंखों से निकले खुशी के आंसुओकी एक-एक बूंद बहुत अनमोल है और उस पल की यादें इतनी कीमती हैं कि उन मीठी यादों की जगह कोई नहीं ले सकता। उसी वक़्त मुझे एहसास हुआ की “संतान लक्ष्मी” के आशीर्वाद से “आदि लक्ष्मी” ही मेरे घर पधारी है।

खाने के प्रति तुम्हारा खास लगाव है, उसमेभी विशेष रूपसे खाने का स्वाद, रंग, विविधता और प्रस्तुति के प्रति तुम बहुत सतर्क हो और इसका खास ख़याल रखती हो। इसी वजहसे हम हमेशा तुम्हारे लिए सुंदर, स्वादिष्ट और स्वस्थ भोजन बनाने के सोच में ही रहते हैं ताकि तुम हसते हसते, एक ही जगह बैठकर जल्द से जल्द अपना खाना समाप्त कर लो। तुम्हारे खाने के व्यजनोंपर चर्चा, अनुसंधान और प्रयास करने के बाद, जब तुम थाली में परोसा पूरा भोजन समाप्त कर मुस्कुराती हो ,तब हमें भी संतुष्टि का आभास होता हैं (तुम्हारा पेट, उम्र, या तुमने पहले क्या, कब और कितना खाया था इसको नजरअंदाज कर, जितना हम उचित समझते हैं उतना थाली में परोसते है और अपेक्षा करते हैं की तुम वो सब ख़त्म करो)। जिस क्षण तुम थाली में परोसा गया पूरा खाना खत्म करती हो, उस वक़्त हमें आसमान भी छोटा लगने लगता है और हम विजयीवीर जैसा महसूस करते हैं। उस वक़्त हमें लगता है की “धान्य लक्ष्मी” ही हम पर कृपा बरसा रही है।

तुम्हारे पीछे दौड़ते दौड़ते या तुम्हारे साहसी काम, खेलक़ुद या अजीब अजीब हरकतोंसे तुम्हे बचाते बचाते हम भी पूरी तरह थक जाते हैं, लेकिन तुम अपनी मुस्कान, नृत्य, शरारत, प्यार और अलग अलग “नौटंकी” भरे कामोसे से हमें ऊर्जा और उत्साह पुनः प्राप्त करने में मदद कर दुगनी तेजी से काम करने की शक्ति प्रदान करती हो। तुम्हे मुस्कुराते हुए देखते हैं ही हम अपनी सारी थकान-दर्द भूल तुरंत तरोताजा हो जाते हैं, मानो “धैर्य लक्ष्मी” ने ही हमें तनाव, दर्द और थकान सहन करने की शक्ति, ऊर्जा और धैर्य का आशीर्वाद दिया हो। झूला, पलंग, कुर्सी, डाइनिंग टेबल, सोफा, सीढ़ियाँ, टॉय कार, कार घूमते आदि वक़्त तुम्हारे खुदके आयु से बड़े बड़े साहसी कार्य हमें यह एहसास करवाते हैं कि “वीर लक्ष्मी” हमारे साथ रह रही हैं।

तुम्हारे माता-पिता दोनों ही पशु प्रेमी नहीं हैं और पशुओसे दूर रहने की ही कोशिश करते हैं। फिरभी न जाने कहासे तुम्हारे मन में पशुओ के प्रति प्यार और लगाव आया है,उसमे भी कुत्ते और हाथीयो के प्रति तुम्हारे मन में विशेष लगाव हैं। जब भी तुम्हे टीवी, लैपटॉप, मोबाइल, टॉय शॉप या किसीभी अन्य जगह पर पशुओ को देखने का मौका मिलता है, तब तुम्हारा आनंद और उत्साह चरमसीमा पर हैं ये तुम्हारे आवाज से त्वरित पता चल जाता हैं। पशु चित्र में है, खिलौना है, टीवी में या असली है इस बात का तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ता तुम्हे उतनी ही ख़ुशी होती है। पशुओ के प्रति तुम्हारा यह लगाव और प्यार देखकर, तुम्हारे रूपमे “गज लक्ष्मी” हमारे आँगन में खेल रही है इस बात की हमें खुशी मिलती हैं।

छोटी चंचल बच्ची तुम, खुद के ही “देर से सोना, देर से उठने” के नियम से जीती हो। तुम्हे जल्दी सुलाने के लिए हम युद्धस्तर का हर संभव प्रयास करते हैं। ताकि एक बार तुम अपने सपनों की रंगीन दुनिया की यात्रा सुरक्षित रूप से शुरू करो, तो हम भी आराम कर अगले दिन के कामों के लिए तरोताजा हो सके। लोरी, गीत, भजन, नृत्य, पढाई आदि अलग अलग तरीकोंसे हम तुम्हे सुलाने की कोशिश करते हैं। लेकिन तुम्हे हमारे प्रयासों पर पानी फेरने के लिए हर रात दोहरी ऊर्जा कहां से लाती हो यह भगवान ही जाने। हम तुम्हे सुलाने की हर नाकाम कोशिश करते रहते हैं और अंत में हार एव थककर मानसिक रूप से सोते हुए किसी तरह हम अपनी आँखे खुली रखकर तुम पर नज़र रखते हैं। शायद तुम हमें ऐसे द्विधा मनस्थिति में देखकर, दया दिखाते हुए सोकर अपनी सपनों की दुनिया में खो जाती हो। उस क्षण हम उत्साहित, राहत और विजयी महसूस करते हैं। तब हमें ऐसा लगता है जैसे “विजय लक्ष्मी” ने ही हमारे सर पर हाथ रखा है।

उम्र और स्वभाव के अनुरूप तुम हर नई चीज को जिज्ञासु और उत्साही नजरसे देखती हो और “हे काय आहे ? हे काय आहे ?” (यह क्या है?) पूछते रहती हो। कभी-कभी तुम्हारे सवालों से हम परेशान हो जाते हैं, लेकिन हमारे परेशानी को नजरअंदाज कर बढ़ी ही मासूमियत से मुस्कराते हुए तुम बार-बार वही सवाल पूछते रहती हो। कई चीजों को बारे में तुम पहले से जानती हों, फिर भी आदत के मुताबिक तुम वही सवाल पूछते रहती हो, और अगर हम गलती से उसके बारे में गलत बोल दे तो जब तक हम अपनी गलती सुधारते नहीं तब तक तुम हमारा पीछा नहीं छोड़ती। आश्चर्यकी बात है की किताबें तुम्हारे खिलौनो के सूची में सबसे ऊपर हैं, जो हमारे लिए भगवान से मिले एक वरदान की तरह हैं। क्योंकि तुम्हे घंटो तक शांत, हसते, खेलते हुए व्यस्त रखने के लिए किताबों का उपयोग हम हथियार के तरह में करते हैं। महत्वपूर्ण बात, जब भी तुम अनियंत्रित रूप से रोती हो, तब ध्यान विचलित करके तुम्हे शांत करने लिए किताबें ही हमारी सहायता के लिए दौड़ी चली आती हैं। तुम्हारा जिज्ञासु, उत्साही मन और पुस्तकों के प्रति प्रेम देखकर लगता है कि तुम्हारे रूप में “विद्या लक्ष्मी” ही हमारे घर पधारी है।

घूमते या टीवी देखते हुए जो भी तुम्हे नजर आता है, वह या तो तुम्हारा या तुम्हारे माँ-पिताजी का होता है। तुम्हारा ऐसे कहते रहना काल्पनिक रूप से ही सही लेकिन हमें कई चीजों का मालिक बना जाता है, जिनमेंसे कई चीजोंके बारे में हम सपनेमें भी नहीं सोचते। तुम्हारे द्वारा हमें काल्पनिक रूपसे मालिक बनाया गया ऐसी चीजे हैं – बाघ, जिराफ, हिरण, हाथी, शार्क, विमान, ग्रह, और बहुत कुछ।
तुम बोलती हो वो हर शब्द हमें देवी सरस्वती के शब्द जैसा ही मधुर और प्यारा लगता है, “बाबा इक्के ये, कम (पिताजी इधर आईये)”, आना पल्ली (आर्ना गिर गयी), बनानाआआआआ, चिक्क्क्कुउउउउ, आंबाआआआ, आई बाबुदाना दे (माँ साबुदाना दो),”आई अप्रीकाट दे, पिता दे (माँ अप्रीकॉट, पिस्ता दो)” ,ओ दीदी (ओवी दीदी) तथा सारा दिन चलने वाली तुम्हारी बातो की गाड़ी का हर शब्द। बातें करते वक़्त तुम्हारे हावभाव, उच्चारण, स्वर, चंचलता, मासूमियत हमारे अनमोल यादों के भंडार को हर शब्द के साथ बढ़ाते रहते हैं।
ऑफिस से घर आते ही,मैं उम्मीद करता हु की सबसे पहले तुम्हे मुस्कुराते या नाचते हुए देखूँ, क्योंकि तुम्हे देखकर ही मुझे तनाव से मुक्ती, खोयी ऊर्जा, ख़ुशी, ताजगी वापस मिलती है, जो मुझे सशक्त, उत्साही और अमीर महसूस कराती है।
टीकाकरण या अन्य किसी भी कारण से रो रही तुम जब रोना बंद करती हो, उस वक़्त हमारे जान में जान आती है और हमें अनमोल खोया खजाना वापस मिलने की खुशी मिलती है।
रोज तुमसे कम से कम २ घंटे पहले हम उठते हैं और बेदिली से ही अपनी दिनचर्या जारी करते हैं। तुम्हे नींदसे उठाने के लिए हमारा मन नहीं मानता, लेकिन जब तक तुम उठती नहीं और तुम्हारे मुंह से निकला दिन का पहला शब्द हम सुनते नहीं, तब तक हम कोई भी काम पुरे दिल से नहीं कर पाते। तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा देखने के लिए और तुम्हारे मुँहसे “मम्मा”, “आई”, या कभी-कभी “बाबा” शब्द सुनने के लिए हम आतुर और उत्सुक रहते हैं। ये शब्द हमारे कानोंपर पड़ते ही हमारा शरीर सक्रिय और उत्साहित हो जाता हैं और पहले कभी ना किया हो ऐसे जोश में काम करना शुरू करता हैं। मानो सालो से इंतजार कर रहे थे वो चीज हमें मिल गयी हो। सबसे महत्वपूर्ण बात, ये खुशी और हसीं की संपत्ती तुम हर दिन हमें देती हो। यह सब अनमोल पल, खुशी, मौल्यवान यादे और किम्मति, निर्दोष हँसीकी संपत्ती, दो साल पहले हमारे घर पधारी “धन लक्ष्मी” ने हमें दियी हैं।

हमारे घर और मन में सहीमे “अष्ट लक्ष्मी” ही आर्ना के रूप में आयी है।

दिन-ब-दिन तुम बड़ी होती जा रही हो। साथ ही साथ हमारे जीवन में तुम्हारे वजहसे आनेवाली खुशी, ऊर्जा, मस्ती, यादें भी बढ़ती जा रही है। और यही हमारी असली संपत्ति हैं जिसे किसीभी और चीज से बदला नहीं जा सकता। आज तुम २ साल की हो गयी, लेकिन इन २ सालो में ही तुमने अपनी मस्ती,खेल, बाते, हँसी, चेहरे हावभाव, मासूमियत, रोना आदि से हमें इतना समृद्ध किया है कि अब और किसी चीज की अपेक्षा नहीं है। मुझे लगता है कि तुम हमेशा हमारी चंचल, प्यारी, मासूम, छोटी परी ही बनी रहो लेकिन ये समय कभीभी एक पिता का मन नहीं समझ पायेगा। इसलिए समय की वास्तविकता को स्वीकार करते हुए, तुम्हे तुम्हारे दूसरे जन्मदिन पर दुनिया की सभी खुशीया,उज्वल भविष्य और सफलता मिले यही सदिच्छा करता हु।

Published by Chetan Nikam

Father of Cute, Sweet, Lovely Daughter who makes me to forgot all my worries, trouble and tension by single word "BABA". Engineer by profession

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