Raktanchal (रक्तांचल) – Hindi Webseries Review in Hindi

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रक्तांचल, मई २०२० में एमएक्स प्लेयर पर प्रसारित एक और सच्ची घटना पर आधारित वेब सीरीज। अपराध-हत्या-गैंगवार-राजनीति-हिंसा-रोमांच से भरे औसत लंबाई के २५-३० मिनट के ९ एपिसोड वाली यह सीरीज।

मुख्य भूमिका में – विजय सिंह (क्रांति प्रकाश झा), आईएएस बनने का सपना देख रहा एक उज्ज्वल युवा छात्र। पिता के हत्या का बदला लेने के लिए वह हाथ में बंदूक उठाता है। अपनी ताकत, भेष बदलने की कला, मेधावी बुद्धि और चतुराई के कारण वह बहुत ही कम समय में आपराधिक और अवैध दुनिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करता है। वसीम खान (निकितिन धीर) पूर्वांचल की आपराधिक दुनिया का शक्तिशाली गुंडा जो स्थानीय विधायक पुजारी के समर्थन से सभी आपराधिक और अवैध धंद्दो पर राज करता है। वसीम की शक्ति और धन के सहाय्यतासे विधायक पुजारी निर्माण, रेल्वे और कोयले के सभी प्रमुख सरकारी ठेके प्राप्त करता हैं।

अन्य सहायक भूमिकाओं में
सीमा (रोंजिनि चक्रवर्ती) नृत्यांगना, कट्टा की प्रेयसी,सनकी को प्यार के जाल में फंसाकर विजय की मदद करनेवाली महिला। बेचनसिंह (चितरंजन त्रिपाठी) विजय के चाचा और मार्गदर्शक। त्रिपुरारी (प्रमोद पाठक) विजय को जेल में वसीम के लोगों से बचाने वाला और साहबसिंह की मदद से विजय की जमानत की व्यवस्था कर उसे जेल से रिहा करनेवाला और फिर विजय का वफादार सलाहकार दोस्त। सनकी पांडे (विक्रम कोचर) कोयला एजेंट और वसीम का खास विश्वासु। कट्टा (कृष्णा बिष्ट) विजय का निशानेबाज। चुन्नू (बसु सोनी) बेचन सिंह का बेटा और विजय का विश्वासु, जो त्रिपुरारी की हत्या होते हुए देखता हैं। साधु महाराज (राजेश दुबे) आध्यात्मिक गुरु और राजनीतिक खिलाड़ी जो चुनाव में साहिब सिंह का समर्थन करता हैं। रोली (सौंदर्या शर्मा) विजय का प्यार। बड़की (प्राची प्रकाश कुर्ने) विजय की बहन। फ़ाज़िला (फराह मलिक)। बिंदू (केनिशा अवस्थी) साहिब सिंह का प्रचार करने वाली अभिनेत्री। बिलाल (शशि चतुर्वेदी) इरशाद की मौत के बाद वसीम का वफादार आदमी। सुधा (प्रवीण भागवत देशपांडे) विजय की माँ। पुजारी सिंह (रवि खानविलकर) १०-१५ सालसे शहर के विधायक जो वसीम का समर्थन करता हैं और शहर में आपराधिक, अवैध गतिविधियां चलाता हैं। साहब सिंह (दया शंकर पांडे) राजनीतिक नेता, पुजारी का प्रतिद्वंद्वी, विजय का समर्थन करने वाला व्यक्ती, जिसे विजय बनारस में पुजारी के खिलाफ खड़ा कर विधायक सीट जीतने में मदद करता है। इरशाद (भूपेश सिंह) वसीम का विश्वासु, जो वसीम के अनुबंध प्राप्त करना और संबंधित व्यवसाय के साथ-साथ अन्य अवैध गतिविधियों का ध्यान रखता है, विजय को देखने वाला पहला व्यक्ति जो उसके बाद विजय के परिवार पर हमला करता है। हिफ़ाज़त (सुशील कुमार श्रीवास्तव) वसीम का आदमी जो उसके अवैध हथियारों के कारोबार की देखरेख करता है। वीरेंद्रसिंह (ज्ञान प्रकाश) विजय के पिता,तत्ववादी व्यक्ती ग्रामीणों के हक्क के लिए लड़नेवाले सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति।

कहानी १९८०-९० के दशक के वाराणसी शहर पर आधारित है और मुख्य रूप से विजय सिंह और वसीम के बैर के बारे में है।

विजय के पिता अवैध खननपे काम करने वाले मजदुरो के हक़ के लिए लड़ने जाते है तब वसीम के गुंडे विजय के सामने ही उसके पिता को बेरहमी से मार डालते है। इसका बदला लेने के लिए विजय और बेचनसिंह वसीम के लोगो को मार डालते है। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है। जेल में विजय त्रिपुरारी से मिलता है।

जेल से रिहा होने के बाद, विजय भूमिगत हो जाता है और खुद का अलग आपराधिक साम्राज्य निर्माण करने लगता है, साथ ही वसीम के खिलाफ भी लड़ता है। एक सरकारी अनुबंध प्राप्त करते समय विजय और इरशाद भिड़ जाते हैं। इसका बदला लेने और विजय को जान से मारने के लिए इरशाद विजय के बहन के गौने के वक़्त उसके घर पर हमला करता है, जिसमें विजय की मां और बहनोई गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। इसके प्रतिशोध में, विजय हिफाज़त को मार डालता है।

विजय जाली वोट डालकर साहिब सिंह को चुनाव जीता कर विधायक बनाता हैं। यह पुजारी और सिद्धांतिकरूप से वसीम की ही हार होती है। इसके बाद वसीम सांप्रदायिक दंगों की साजिश रचकर, दंगो में साहिब सिंह को मार देता है। जिसमें त्रिपुरारी का भी हाथ टूट जाता है। इस घटना के बाद गुस्साया विजय इरशाद को मार डालता है। इरशाद के मरने के बाद, सनकी वसीम का विश्वासपात्र और करीबी व्यक्ति बन जाता है। वसीम के कहने पर सनकी विजयको मारने के लिए उस पर हमला करता है। सीमा और कट्टा इस हमले से विजय की जान बचाते हैं। साहिब सिंह की हत्या के बाद, वसीम फिर से पुजारी को विधायक बनाता है। इसके बाद वसीम विजय की ताकत कम करने के लिए त्रिपुरारी को मार देता है।
विजय सीमा की मदद से सनकी को प्यार के जाल में फंसाकर उसे मारने योजना बनाता लेकिन २-३ कोशिशों में भी विजय उसे मारने में नाकाम रहता है।
आखिरकार विजय योजना बनाकर पुजारी की ही हत्या कर देता है।

बाबा, एक अज्ञात पात्र, विजय को एक किसान की जमीन अवैध रूप से खाली करने का कहता है। किसान की बेटी की शादी के बारे में पता चलने के बाद, विजय अपना मन बदलता है और बिना कुछ किए किसान के घरसे निकल जाता है। इस बात का फायदा उठाते हुए, वसीम के लोग किसान के घर पर विजय के लोगोका रूप लेकर हमला करते है और किसान के परिवार के साथ अन्य लोगों को भी बहुत बेरहमी से मार डालते है। इस सामुहिक हत्याकांड के लिए विजय को जिम्मेदार कहते हुए उसे सार्वजनिक दुश्मन घोषित किया जाता है और उसे देखते ही गोली मारने का आदेश दिया जाता है।

वसीम विजय को अकेले मिलने के लिए बुलाता है। मुलाकात के दौरान दोनों गिरोहों के बीच हुई गोलीबारी में वसीम और विजय गंभीर रूप से घायल हो जाते है। घायल विजय नदी में गिरकर बह जाता है, विजय की मृत्यु से उसके घर में आक्रोश होता है और परिवार शोक मनाता है। सनकी विजय और गिरोह को मारने में असफल होता है और यह बात बताने के लिए घायल वसीम के पास लौटता है। श्रृंखला एक बड़े और अनुत्तरित मोड़ पर समाप्त होती है इस वजहसे दूसरे सीजन की राह देख सकते।

सत्यघटनाओ पर आधारित और हिंसा से भरी इस सीरीज को “रक्तांचल” शीर्षक बहुत समर्पक है। कुछ दृश्य और घटनाएं वास्तव में व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं। सभी कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया है। अगर आप “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” के चाहते हैं, तो निश्चित रूपसे उसी समान स्तर के अभिनय और दिखायी हिंसा के वजहसे यह श्रृंखला आपको पसंद आ सकती है। अन्यथा न देखकर आप अपने दिमाग को अपराध, गिरोह युद्ध, आपराधिक दुनिया की निंदा से दूर रखकर शांत और सकारात्मक रह सकते हैं।

Published by Chetan Nikam

Father of Cute, Sweet, Lovely Daughter who makes me to forgot all my worries, trouble and tension by single word "BABA". Engineer by profession

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