इस घटना के सभी पात्र कल्पना की उपज है, लेकिन फिर भी इनका संबंध वास्तविकता से सकता है।
स्थल – एक सर्वसाधारण मध्यम उम्र का परिवार।
समय – पती-पत्नी के बीच चल रहा शीतयुद्ध जब चर्चा(?) और विचार-विमर्श (?) की सीमाये लांघकर बहस की और बढ़ रहा था।
इस समय तक पत्नीने शीतयुद्ध का असली मुद्दा ब्याज के साथ, भविष्य में उपयोग करने हेतु दिमाग़ की बैंक में जमा कर दिया था और पती अपने ग़ुस्से के चरम पर था ( इस बात का घटना या पत्नी पर कोई असर नहीं पड़ता)।
बहस में दोनो में से कोई भी हत्यार डालनेको तयार नहीं था। बात एक दूसरे के परिवार वालो के स्वभाव गुण निर्देश से आगे निकल कर एक दूसरे की “अकल” की सीमाये ढूँढने तक आ गयी थी। इस वक्त पती ने शांत हो कर हुकुम का एक्का फेंका और एक दूसरे से “सामान्य ज्ञान” के सवाल पूछकर कौन ज़्यादा होशियार इस बात का फ़ैसला करने के सुझाव दिया। (सिर्फ़ सुझाव देना ही उसके कार्यक्षेत्र में आता था)। पत्नी ने तुरंत सुझाव को मान्य भी कर लिया।
इस बात से पती इतना ख़ुश हुआ मानो जैसे जंग जीत ही गया हो। मन ही मन उसकी योजना भी तैयार हो चुकी थी। उसने तय किया की “भारत के वर्तमान राष्ट्रपती का नाम क्या है?” जैसे आसान सवालोसे शुरुआत करते हुए अगर इसके बाद ज़रूरत पड़ी ही तो आगे-आगे तीखे सवाल पूछेगा।
पता नहीं क्यु? लेकिन “सामान्य ज्ञान” शब्द आते ही दिल ही दिल में उसने खुद को विजेता घोषित कर पुरस्कार भी दे दिया था। दिल की ख़ुशी चेहरे पर ना दिखाते हुए उसने पत्नी को “कच्चा नींबू” समझकर “सामान्य ज्ञान” का पहला सवाल पूछने को कहा और मन ही मन मुस्कारने लगा।
पत्नी ने भी पूरी जोश के साथ “सामान्य ज्ञान” का अपना सवाल पती की और फेंका “ Big Boss के किसी भी एक सीज़न के विजेता का नाम बताओ”…..।
ये सवाल सुनते ही महत्वपूर्ण मैच में पती “हिट विकेट”आउट हो गया।
१०५ दिन हो गए, पती घर के “Big Boss” से हारकर “Big Boss” का घर धुंड रहा है…।