Special Ops – Web series Review in Hindi

Special Ops KKMenon Series

Special Ops, १७ मार्च २०२० को Disney+Hotstar पर प्रदर्शित हुयी वेब सीरीज। सीरीज में देशप्रेम-गोपनीय-रोमांचक-जासूसी से भरपूर ४४ से ५५ मिनट की औसत लंबाई वाले ८ भाग है।

कहानी चार प्रमुख पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है, पहला पात्र के के मेनन द्वारा निभाया गया हिम्मत सिंह का है जो एक रॉ अधिकारी है, जिनकी उनके द्वारा चलायी जा रही अलग अलग कारवाई में हो चुकी वित्तीय विसंगति के लिए पूछताछ हो रही है,बेटी से प्यार करने वाले एक संशयित पिता। दूसरा पात्र है फारूक अली / अमजद शेख / रशीद मलिक (करण टाॅकर) पूर्व सॉफ्टवेयर पेशेवर और अब एक RAW का जासूस है जो दुबई में तैनात है, जिसे हिम्मत ने RAW में भर्ती किया है। तीसरा पात्र हाफ़िज़ अली (सज्जाद डेलाफ्रोज़) आतंकवादी गिरोह जमात का कमांडर और अब दुबई में व्यापारी जो जमात के लिए धन की व्यवस्था करता है, भारत में हुए विभिन्न आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड। चौथा, इखलाक, एक गोपनीय पात्र है।

अन्य सहायक किरदारो में है, अब्बास शेख (विनय पाठक) दिल्ली के एक पुलिस निरीक्षक, जो हिम्मत सिंह और मंत्री थापर के भरोसेमंद हैं। बाला (विपुल गुप्ता), अविनाश (मुज़म्मिल इब्राहिम), जूही कश्यप (सैयामी खेर), रूहानी सईद (मेहर विज) विशेष ऑपरेशन के लिए खाड़ी के देशों में तैनात और हिम्मत द्वारा RAW में भर्ती किए गए जासूस। इस्माइल हसन (रजत कौल) हाफिज की वित्तीय गतिविधियों को देखनेवाला उसका बहुत करीबी सहाय्यक,जिसका उपयोग फारूक हाफिज को फंसाने के लिए करता है। सोन्या (सना खान) फारूक से प्यार करनेवाली इस्माइल की सहाय्यक। वसीम कराचीवाला (के सी शंकर) हाफिज के बाद जमात का दूसरा ताकदवर व्यक्ति। नरेश चड्डा (परमीत सेठी) जांच दल के अधिकारी और मंत्री थापर के निकटवर्तीय, जब हिम्मत को पैसा मिलना बंद होता है तब वो हिम्मत के लिए पैसे की व्यवस्था करता हैं। श्री डी.के. बनर्जी (काली प्रसाद मुखर्जी) जांच दल के दूसरे अधिकारी जो गर्म मिजाज के है। सादिया कुरैशी (दिव्या दत्ता) भारत-पाक चर्चा स्थल के लिए नियुक्त आत्मघाती हमलावर, भारत में मुजफ्फरनगर के दंगे के बाद हाफिज से शादी करती है। फराह कुरैशी (पाकी गुप्ता) सादिया की बहन और भारत-पाक चर्चा स्थल के लिए नियुक्त एक और आत्मघाती हमलावर, मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान उसके साथ बलात्कार हुआ था। सूर्य कुमार (शरद केलकर) भारत में पाक रक्षा मंत्री की सुरक्षा के प्रभारी आईबी अधिकारी जो हिम्मत के साथ समन्वय कर होनेवाला हमला रोकते है। चिंतन (पवन चोपड़ा) हिम्मत के वर्तमान उच्च अधिकारी। जी.पी. माथुर (बिक्रमजीत कंवरपाल) २००१ के संसद और मुंबई २६/११ हमले के समय हिम्मत के उच्च अधिकारी। इलियास हसन (राजेंद्र चावला) कार चालक जो फारूक को वसीम के बारे में जानकारी देता है। सुजाता थापर (सोहिला कपूर) भारतीय मंत्री, हिम्मत को मारने की योजना बनाती है क्योंकि वह उनके बेटे द्वारा किये गए अवैध व्यापार के रहस्यों को जानता है। पप्पू हरमज़ादा (आलोक पांडे) पाक से हिम्मत को मारने आये हमलावर के लिए सुरक्षित घर की व्यवस्था करता है। हबीब नाइक (बिजेंद्र गुप्ता) मानव तस्कर जो लड़कियों को खरीदता है और खाड़ी के देशो में उनकी शादी करता है, सादिया और हाफिज की शादी करवायी थी। जहीर रज़ा (राहुल वोरा) शांति वार्ता के लिए भारत आए पाक रक्षा मंत्री। मंसूर (अभिरॉय सिंह) पाक रक्षा मंत्री के सुरक्षा प्रभारी पाक अधिकारी, जो सादिया की मदद करता हैं। बख्तियार खान (अरविंद वाही) पूर्व दुबई पुलिस अधिकारी, लोगों को मार हाफिज को अवैध रूप से मदद करता है। सरोज सिंह (गौतमी कपूर),हिम्मत की पत्नी, हिम्मत पर हमले के बाद अब्बास से मदद मांगती है। परी सिंह (रेवती पिल्लई) हिम्मत की बेटी।

हिम्मत पूछताछ के दौरान पिछले आतंकी हमलों और उसमे हुयी जांच के बारे में बताता है। इसलिए कहानी वर्तमान और अतीत में साथ साथ चलती है।

सीरीज की शुरुआत हिम्मत ने किये भारी खर्चों की पूछताछ से होती है, जिसमें विभिन्न ऑपरेशनों और जासूसों पर किये खर्चे के बारेमें उसके पास कोई स्पष्टीकरण नहीं है। पूछताछ में, अधिकारी हिम्मत से २००१ संसद हमलेपर उनके नजरिये के बारे में पूछते है। संसद हमले के वक़्त छठे आदमी की उपस्थिति के बारे में हिम्मत निश्चित है, वह मानता है की इस छठे आदमी ने ना सिर्फ हमले की योजना बनाई बल्कि हमले के दौरान वह वहां मौजूद भी था। वही ऐसे अन्य हमलों के पीछे का मास्टरमाइंड भी है।

पूछताछ में, हिम्मत संसद हमला, २६/११ मुंबई हमला और इसी तरह के अन्य हमलों के बीच के संबंधों के बारे में बताता है और दावा करता है कि इसके पीछे एक ही आदमी का हाथ है। संसद हमले के बाद, इखलाक हिम्मत के हाथोसे से बच निकलता है और जांच करते हुए हिम्मत को उसका जला हुआ पासपोर्ट मिलता है। हिम्मत की इस बात को कोई भी नहीं मानता और जांच अभियान बंद कर देते है। सभी संस्था और अधिकारि संसद हमले के पीछे छठे व्यक्ति के हाथ होने की बात से इनकार करते है, इसलिए हिम्मत उस व्यक्ति को खोजने के लिए ५ जासूसों की एक टीम बनाकर उन्हें खाड़ी के ५ अलग-अलग देशों में भेजता है। और इखलाक के बारे में पता लगाने के लिए १८ वर्षों में उनपर बड़ी रक्कम खर्च करता है।

२००८ मुंबई हमले के गिरफ्तार आतंकवादी से, हिम्मत को वसीम कराचीवाला और एक नकाबपोश कमांडर का पता चलता है, जिन्होंने इन हमलावरों को प्रशिक्षित किया था। फारूक हिम्मत को बताता है कि वसीम हर महीने दुबई आता है। फारूक ड्राइवर इलियाससे वसीम के बारे में पता लगाता है। फारुक और जूही दुबई से वसीम का अपहरण करते हैं, लेकिन पूछताछ के दौरान वह मारा जाता है।मरते वक़्त वसीम, संसद हमले के दौरान छठे व्यक्ति और वैसे ही कई हमलों के पीछे एक ही मास्टरमाइंड होने की पुष्टि करता है। फारूक को पता चलता है की दुबई में वसीम इस्माइल से मिलता था।

हाफिज के करीब आने और इखलाक का पता लगाने के लिए फारूक इस्माइल के साथ जान पहचान बढ़ाता है। इस बीच हाफिज इस्माइल के भाई को पैसे चुराने के आरोप में मार देता है। हामिद को इस चोरी में फारूक का हाथ होने के बारे में पता चलता है। वह फारूक को ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है इसलिए फारूक उसे मार देता है।

भारत में विमुद्रीकरण के बाद, हाफिज़ को जम्मू-कश्मीर में जमात के लिए १ करोड़ नकद की आवश्यकता है, इस अवसर का फायदा उठाते हुए इस्माइल फारूक और हाफिज की जान पहचान करवाता है और फारूक भी उसके लिए धन की व्यवस्था करवाता है। लेकिन फिर भी हाफिज फारुक से मिलने से इनकार कर देता है।

जमात की तेल कंपनी रूसी कंपनी के साथ समझौता करने की तैयारी में थी,उसी वक़्त हिम्मत पाकिस्तान में जमात के नाम पर बमबारी कर जमात के खातों पर रोक लगा देता है। इस बार फिर इस्माइल सौदे के लिये फारूक का नाम आगे करता है। हाफिज उसे मिलने के लिए बुलाता है और सौदे के लिए बाकू चलने के लिए कहता है, जहां इखलाक भी आनेवाला है। हिम्मत बाकू में इखलाक को मारने की योजना बनाता, लेकिन उसकी टीम ये मौका गंवा देती है। फिर वो लोग हाफिज को होटल से अगवा करने की योजना बनाते हैं, लेकिन वहां हाफिज बाला को मार देता है। इस हमले के बाद, हाफ़िज़ को उसके आसपास जासूस होने के बारे में पता चलता है, इसलिए वह इस्माइल से उसे खोजने के लिए कहता है। किसी तरह फारूक को यह पता लगता है और वो इस्माइल को फंसाने की योजना बनाता है। इसे योजना को ठोस बनाने के लिए वो सोन्या को मार देता है। इस्माइल फारूक के साथ भागते समय हाफिज के बारे में कई राज उजागर करता है और इखलाक के बारे में भी बताता। रूसी भी हाफ़िज़ को पुष्टि करते है की इस्माइल ही जासूस है। तब हाफिज फारूक को उसके साथ इस्लामाबाद चलने को कहता है जहा वो लोग इख़लाक़ से मिलेंगे।

पूछताछ के दौरान, हिम्मत अपने जासूसों, मिशन और खर्चों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताता। मंत्री थापर अब्बास को हिम्मत का पीछा कर उसकी पल पल की खबर देने को कहती है। हिम्मत को मारने के लिए वह पाकिस्तान से एक हत्यारे को बुलाती है। लेकिन उसे मारने के असफल प्रयास के बाद, वह चड्डासे कहती है कि जब भी पूछताछ के दौरान उनका नाम सामने आये तो वो अनदेखा कर दे।

दिल्ली में अब्बास हबीबको ३ लड़कियोंकी तस्करी करते हुए गिरफ्तार करता है और उसे हिम्मत को सौंप देता है। हबीब हिम्मत को सादिया, पाकिस्तान में उसकी शादी, उसका पति और बहन इस सब के बारे में बताता है। हबीब इखलाक के बारे में भी एक रहस्य का खुलासा करता है। ये नई जानकारी बताने के लिए हिम्मत तुरंत फारूक को कॉल करता है।

फारूक को भी इखलाक के बारे में महत्वपूर्ण रहस्य का पता चलता है। उसी वक़्त उसे हिम्मत का फोन आता है और दोनों एक दूसरे को एक ही रहस्य उजागर करते हैं।

हिम्मत, फारूक के साथ हवाई अड्डे जाते वक़्त हाफिज को मारने की योजना बनाता है। हवाई अड्डे जाते वक़्त, कार में हाफिज को बख्तियार का फोन आता है और फारूक ही भारतीय जासूस होने की बात बताता है।

आगे क्या होता है? संसद हमले के बाद इखलाक कैसे बच जाता है? हिम्मत पर किसी को भरोसा क्यों नहीं होता? इखलाक का रहस्य क्या है? वह कहाँ छिपा होता है? हाफिज उसे कैसे बचाता है? मंत्री थापर हिम्मत को क्यों मारना चाहती है ? सूर्यकुमार और हिम्मत पाक रक्षा मंत्री को कैसे बचाते है? बख्तियार को फारूक के बारे में कैसे पता चलता है? इस्माइल के साथ क्या होता है? सादिया की कहानी क्या है और वह पाक रक्षा मंत्री को क्यों मारना चाहती है? ऐसे ही कई और सवालों के जवाब श्रृंखला में दिए गए हैं और जो श्रृंखला में देखना ही अच्छा है।

एक अच्छी कहानी और केके, विनय, सज्जाद और करण द्वारा उतने ही अच्छे अभिनय वाली वेब श्रृंखला है, जिसके कुछ दृश्यों में सहाय्यक कलाकारों द्वारा कियी गयी ओवरएक्टिंग और थोड़ा अतिरिक्त मसाला स्वीकार्य है। रोमांचक, सस्पेंस और मनोरंजन से भरपूर यह वेब शृंखला जरूर देखने जैसी है। ९ / १० *

Published by Chetan Nikam

Father of Cute, Sweet, Lovely Daughter who makes me to forgot all my worries, trouble and tension by single word "BABA". Engineer by profession

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